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श्रीरस्तु

श्रीमन्महाभारतम्‌

तत अनु ९^. नु्रासनपर्वणि द्वितीयो भागः मद्रपुस्यजकीयकलाक्चालसंखृताचार्यः बि, ए. (आक्सन्‌ ) एम्‌. ए. (मद्रास्‌) इत्यादिविरदाङ्कितेः मि्यासागर विद्यावाचस्पति. पर. पि. सुत्रहमण्यसक्षिभिः दक्षिणायश्ाखातसारेण सविर संशोधितः

© अर्हिसा परमो धमः

हमक „< [९ [1 4 अर्हिसा परमं तपः। अहिंसा परमं सल

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चेन्नपुयां गावि रमखमिशघृट अण्ड सन्स्‌ इतेः सम्मुब प्रकाशितम्‌

चेच्नपुय चाचिद्धु सुदण्णख्ये

स्ुदितम्‌

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श्रीरस्तु महामारतस्यानुश्ासनपवेणि द्वितीयो भागः तत विषयानुक्रमणिका

-----नन्िन्न-----

आनु्ासनिकपवे

दवितीयसम्पुटम्‌ "अध्यायः ५९ अतिनिमिसवादेन श्राद्धे वञनीयाना धान्यक्षाकादीनां ग्रतिपादनम्‌ निमिनाऽमाघ्रास्यायां श्राद्धविधानम्‌ अत्तिणा श्रादविधिनिरूपणम्‌ श्रद्धे भगाहाणं विश्वरेण नामकथनम्‌ श्राद्धानदधान्यद्ञाकादिनामनिरदैश्षः

[क

निमिना यथाविधि श्राद्धविधनिन पितृ तृ्िप्रकारः वणनम्‌

अधिना श्राद्धे पितणामजीणेय जीर्ण(करणेन ्रधमभाग-

स्वीकरणम्‌ श्राद्धस्य निवापरूप्वे तदहिधिनिरूपणम्‌ -८० उपवासरुक्षणफरादिनिरूपणम्‌ बद्यच्यरक्षणकथनम्‌ .

भगवद्धागवतेम्यो निबेदितहेपस्याक्ञनविधि- निरूपणम्‌

पुटम्‌

६९० ६९८ ६५९

#09

७०१

७०२

७०२ + 11 ७०६ ७०७

अनुश्ासनपवेविषयानुक्रमणिका

अभ्ययः

सप्तपिवृषादविसंवादेनासछतिग्रहख निन्दघ्ठकथनम्‌ ृषादर्विणा सपर्धन्‌ प्रति खसमात्‌ परतिगरहपराथनम्‌

सक्षिभिः वृषादधिसकाश्चात्‌ परतिग्रह्ानङ्गीकारहैतु-

कथनम्‌

वृषादर्विणा सप्तर्षीणां हननाय कूलयौप्पादनम्‌ कयया सक्तषिहटननाय घनगमनम्‌

सपर्षीणां भिक्चुरूपिणेनदरेण समागमः स्षिभिररन्धरी प्रतीनद्रख पीवरप्वकारणकथनम्‌

सक्तषिभिः विसग्रहणाय पद्िनीरक्षण्य कृत्याय खस्वनाम-

निर्दशं पद्मी प्रति गमनम्‌ सप्तिभिः पञ्चन्यां कृता प्रति खस्नामकथनम्‌

छयया निदिष्टनाश्नस्सपर्षन्‌ प्रति प्रतयेकक्षः पद्चिन्या-

मवतरणाभ्यनुक्तानम्‌ यया सप्तषीन्‌ प्रति सहतूपपादने खस्यारन्धतीत्व- निरूपणम्‌ इन्दरेणरन्धत्याक्िमिदैण्डैः हननम्‌

सप्तर्षिभिः बिसस्तेन्ये सेष्वपराधनिवृत्तये नानाक्पथ-

करणम्‌ इन्द्रेण खस्यैव बिसस्तेन्यङृखग्रतिपादनम्‌

तपर्षिभिरगस्त्य प्रति स्वेषु शपथपूर्वं पद्सतन्यशङ्का-

निवारणम्‌ इन्दरेणागस्त्य प्रति पञ्चापहारख प्रयोजनोपपादनेन प्रसादनपूर्वके पञ्चप्रतिपादनम्‌ ८२ जमदग्चिना रेणुकानीतबणिः कऋरडाविधानम्‌

जमदग्निना रेणुकाया सुयो पतापध्रवणेन भूमो सूयैपा- तनोद्मनम्‌

पदम्‌

७०९.

५१८. ७२०.

५९१ ७२४.

७२५. ०२८

७३०

५३८. ७६१

७४२.

अनुश्षासनपवेविषयातुक्रमाणिका

अन्यायः

८२ सूर्यण जमदिप्रसादनम्‌

८२ सूर्येण जमद्रये श्षरणागतिविधानम्‌ भमदभनिना मू प्रति क्षरणागतहनते दोपभूयस्छनिवेदन-

पूषैकमभयप्रदानम्‌

सूर्येण जमद प्रति छतोपानसदानम्‌ छेतोपानश्यदानसखय फलनिरूपणम्‌

८४ पराशरोक्तदयुद्धमादीनां निरूपणम्‌ यै विष्यतिक्रमणे निङृषटनानाजातिषु सञुद्धवः ब्राह्मणादिधमेनिरूपणपू्क शुद्र यतिशुरषाप्रकारः

कथनम्‌ यतिधमेनिरूपणम्‌ यतीर्ना श्नाचप्रकारनिरूपणम्‌ | महाश्नाचनिरूपणम्‌

कारुदेशा्यानुगुष्येन शाख गोरवटाधवकथनम्‌ शोचानन्तरं क्षारनाचसनादिनिरूपणम्‌

आचमनमासैनादिमिः चगवेदादिप्रीतिकथनम्‌ ब्राह्मणादीनां वृत्तिनिरूपणम्‌ चयद्रख यतिदुशपाप्रकारकथनम्‌ श्ुदख यत्िविषये स्थितिप्रकारकथनम्‌ युद्स धर्माद्यनधिकारकथनम्‌ नुद परघ्लीसङ्गमदोपे प्रायशित्तकथनम्‌ अरिष्परा्तिक्षणकथनम्‌ पुरुषस्य सुकृतविद्रोषेण खर्गादिप्रा्िकथनम्‌

` सवगत पुरुश्य पुनम जननकथनम्‌ सर्गात्‌ पुनभूमा जात पुर्पस्योपनयनादिकथनम्‌ ..

\,

७६५

७६५ ७६६

9६५

अनुशासनपवेविषयानुक्रमणिका

अभ्यायः

८४ स्तवि पुनः पुनः खरोकादिपराक्षा जत वेराग्यख पुरुपसापुनरव्त्तरक्षणमे्षप्रप्ा वभिलापादिकथनम्‌

छुमाशुभकमैभिः शुभाश्चुभफरप्रापिकथनम्‌

८५ ईन्द्रमातकिसिवादेन नमस्कारप्रयोजकगुण्तिपादनम्‌ ““

नमरकारप्योजकगुणवन्महास्मनां रश्चणकथनम्‌ ^ ८६ तटाकनिर्माणफरनिरूपणम्‌ वृक्षारोपणफरनरूपणम्‌

८9 मूदेवीश्रीमगवत्सवादेन गृहस्यधमपरतिपादनम्‌ गृहस्यघर्माणां निरूपणम्‌ अतियिशबदनि्ैचनपूतैकमातिध्यकरणविधानम्‌ वेवदेवशव्दाथनिरूपणम्‌

८८ सुवणेनासकमुनिना मयु प्रति गन्धपुष्पधपदीपदान-

एलग्र्षः बरिश्चुकरसवादेन गन्धपुष्पपूपदीपदनपरकथनम्‌ धूपग्रदानफरुकथनम्‌ दीपग्रदारफलकथनम्‌

देवतातिथिबारुकादीनामग्रते भक्तृखरियमनम्‌ बरिमिदेन पूजाहैमेदनिरूपणम्‌ ८९ सहुपचरितकथनेन बरिदीपप्रदानम्‌ नहुपेण खरछोकस्थियहङ्कारेण सपर्षा्‌ प्रति स्वयानवहनचोदनम्‌ भूृगुणाऽगस्सयै प्रति नहुषस्याधःपातनप्रतिक्ञानम्‌ “~ ९० नहुषेण खरकं बल्यादिकमसु च्युतिः नहुपेणागस्यं प्रति खवाहनवहनाय निथोजनम्‌ भृगुणा नेहुपश्चापकरणायागस्यजटान्तमेवनम्‌

| ,

७७८

७८१९

७८५ ०८६ ७८७

9१

७८९ ५९१ ५९३ ५९४ ५९५ ०९६ ७९७

9९८

८००

८०२

८०३

अनुरासनपवेविषयानुक्रमणिक।

अष्याः

९० नहुपेण चामपादेनागस्यस्य शिरण्ाइनम्‌ ~ मगुणा नपे प्रति सपैरूपावस्यानरूपद्रापविधानम्‌ .. नहुपेण भृगु प्रति ग्वश्षापविमोक्षणोप्रायप्राथनम्‌ ~“ भृगुणा अगस्यवचनेन नहुष युधिषठिरष्ारा श्ञापमो-

क्रकशरनम्‌

दैः इन्द देवरल्येऽभिपेचनम्‌ दीपदान फलप्रतिपादनम्‌

९१ नृपचण्डालसवादेन व्रह्मखहरणयानथहेतु्वकःनम्‌ ~ चण्डहिन व्रह्मख्लहरणेनानर्थारपन्िकश्रनम्‌ चण्डारेन राजानं प्रति चण्डारटलनिद्रयुाय-

प्रथनम्‌

राज्ञा चण्डाठं प्रति चण्डारघनिवृद्युपयकथनम्‌

५२ इन्दरगोतमसंवादेन पुण्यपापकमैफटमेदथनम्‌ इन्द्रेण धतराष्ररूपेण गातमव्धिततगजग्रहणम्‌ गातमेनेन्द् प्रति राजहरणनिपेधेऽपि तेन तदनङ्ग-

करणम्‌ गजहरणनिमित्त देवखतरकग्राकठाविन्ध्रगौतमयोः पुण्यपापफरनिरूपणे विञेषतस्सवादः

पापकमेणां तारतम्यनिरूपणम्‌

पुण्यकर्मणां तारतम्यनिरूपणम्‌ इन्द्रेण सगं गोतम प्रति सादरसमाजन पुण्यरोकान- नुशाख स्वस्थानगमनम्‌

९३ ब्रह्मणा भगीरथ प्रति खरोकागमनप्रकारयश्चः भगीरथेनान्नादिदानेनापि खल परलयेकागमनासम्म- वकथनम्‌ भगीरथेन ब्राह्मणेभ्यो गवादिदानप्रहंसनभ्‌

८१४ ८१५ १६

८२४. ८२६

८२५. ८२८

अनुशासनपषविषयानुक्रमणिका

अन्यायः

५३ भगीरथेन ब्राह्मणवचनेनेव खस्य ब्रह्मरोकप्राि- कथनम्‌

अनशनत्रतस्य ब्राह्मणवचनसय प्रेयस्साधनत्व- कथनम्‌

०४ सदाचारस्याुतदधिकारणस्वकथनम्‌

दुराचारश्यागुहां कारणत्वकथनम्‌

धमैसाचाररुक्चणत्वकथनम्‌

प्रातस्सन्भ्यायाः बाहयुहूतैकतेन्यस्वकथनम्‌

तरहषीणां दीर्ायुष्यं प्रति दी्ैसन्भ्यायाः कारणत्व- कथनम्‌

परदारगसननिषेधः

स्नानादीनां पूजनान्तानां पूर्वाह्न एव कर्वन्यसख- नियमनम्‌

स्थानविषेषेषु मूबपुरीपोत्सगेनिषेधः

भोजनादिषु दिङ्नियमकथनम्‌

भोजनावसरेऽवस्थाननियसकथनम्‌

उच्छिष्टसमये खाध्यायादयध्ययननिपेधेयमगाथा- कथनम्‌

आदियामिमुखमेहनस्याद्पायुष्यकारणत्कथनम्‌

बराह्मणश्च्नियस्पाणा कदाऽप्यनवसन्तव्यत्वकथनम्‌ --.

गुश्निन्दाया अनथेहतुस्वकथनस्‌ अक्तातैस्सह कारविकेषेषु गमननिषेधः कारुविरेषेषु वद्यद्याचरणनियमनम्‌ पण्डितेन परेषु कठिनोत््यादिविसर्जनम्‌ सदाचारादिनिरूपणस

स्दापादिके प्रति दिङ्नियमकथनम्‌

अनुक्चासनपवेविषयानुक्रमणिका

अन्यायः

#॥ 4.1

९९

९६

धघार्यवष्लनियमकथनम्‌

अमक्ष्यापेयादिषस्तुकथनम्‌

वाददैवपेतृकतीथानामङ्क्ादिस्यानविरेषेण विसञेन- कथनपूर्ैकं भोजनानन्तरं कतैभ्यविधिनिरूपणम्‌ ..

दिवा मैधुननिषेधकधनम्‌

अनृतुस्नातद्लीगमननिपेधः

@

गृहेषु मङ्गलथं स्थाप्यवस्तूनां कथनम्‌

गृहेषु दुजन्तूनां समवेन्ने शान्तिहोमाचरणनियमनम्‌

सन्भ्यायां वञ्चनीयक्छमनिरूपणम्‌

उद्वाद्यकन्याङक्षणकथनम्‌

तैखाभ्यज्ञनेनिपिद्धतिथ्यादिकथनम्‌

जनु दाह्यकन्यारक्षणादिकथनम्‌ कत

अनायुष्यकारणदुराचारकथनम्‌

पितृत्रा्यपरिपाल्नस्यावर्यकतरकथनम्‌ अध्येतव्यश्नाष्या्णां त्रिमारकथ्रनस्‌ गोत्राह्यगार्थे प्रणपरिन्यागस्य नियमनम्‌

समविपमदिन-कमेणतुस्नातस्यभिगममे पुपुदी- प्रादुभौवकथनम्‌

आचारस्य सर्वप्रै्टयकथनम्‌

व्येष्स्य गरीयस्त्रेऽपि रूप्ये राजश्षासनीयस्वेन विभागानरलवक्थनम्‌

सर्वापेक्षया मातुरौरीयस्स्वकथनम्‌ ~ कनिष्टेन स्येष्टविपयेऽवस्यानक्छमकथनम्‌

अद्धिरोकचनेन पश्चमासापवासफरूकयनम्‌ थिधिक्ञेपोपवासेन एर्विरेषकथनस्‌

270

८9 ८४

८४६

५9 ८9

9 ८9८ ११

८४१

८५०

८५१

८५२ #

८५३

<

८५६ %9

षड

८4९

अनुश्चासनपवेविषयातुक्रमणिका

अन्यायः पुटम्‌. ९६ द्वादक्षमासोपवासेन एरविक्ञेषकथनम्‌ ... ८६५. विश्वामिवेण व्राह्मणयप्राप्ता कारणनिरूपणम्‌ ~ व्द्षः ९७ युधिष्ठिरेण दरिः यज्ञानां दुष्करतया त्परतिनिधि

कश्रतप्राथना " ८६६ उपवासबाहूल्येन विरेण यक्तफखसिद्धिकथनम्‌ --- ८६७.

उपवासफखानां विस्तरेण भेदनिरुपणम्‌ शमदमादीनां गुणानां सदतिहेतुखनिरुपणम्‌ ... ८६८ परल्लीगयनाभावस्य सद्तिप्रापकत्वकथनम्‌ ... ८० ५८ रद्रसनत्कुमारसवदेनाभ्याव्मश्नाश्यविवरे चनम्‌ ... धटे अभ्यात्मदाश्िवेयतत्वप्रकारप्रषः ~ धधयः

कमैबन्धविमोक्षख सैविध्यकथनम्‌ मनुजः परमा्मप्रा्यमावेन पानः पुन्येन भ्वादिकेषु

परिवतैनम्‌ ~ ८८६ मतभेदेन तत्वसङ्खयाभेदकथनम्‌ ^ ्राङ्ततच्चोत्पत्ति्रमनिरूपणम्‌ ... ८८9 त्वाना वरेकारिकत्वनिरूपणम्‌ ... ८८८ आभ्याद्मिकादितयनिरूपणम्‌ ... ८८ तत्वज्ञानोपदेशपावनिरूपणम्‌ ~ तरवा टयक्रमनिरूपणम्‌ ... ८९० आध्यास्मिकाधिदैविकतस्वनिरूपणम्‌ .„ ८९,

[क {~ = क, ^ आध्यातमिकाधिमातिकाधिरदेवकानामाव्रह्मकीखवृत्तिख-

कथनम्‌ | .. “यर्‌ श्रीभगवतो नारायणस्येव सकरुदुःखविनिमोकपूवैक-

निरतिक्षयानन्दमोश्चसाम्राज्यप्रदानहेतुत्वकथनम्‌. +

देवष्यादिभिः श्रीमतो नारायणस्यैव सकलदुःख- निवारक्वकूथनम्‌ , «८९.

अनुर्चासनपवेविषयानुक्रमणिका

अन्यायः पुटम्‌ ५८ देहाश्रितदेवतानाः नामकथनम्‌ . ८९४ आत्मयानिनो लक्षणादिकथनम्‌ ८९५ जीवस देहान्निष्कमणवरायां सद्छमणस्थानकथनम्‌ -~ ८९६ प्राृतपुरुषस्य कारणभेष्ेन सक्ताभेदः ... ८९४ योगकृ्यनिरूपणम्‌ ५. योगनियमादिकथनम्‌ + ८९८ पुरषेण श्रीभरव्रह्विपयकर्ानाभावेन समाराधिगमः .- ८४ योगाङ्गगुणा्टकनिरूपणम्‌ 2 साङ्ख -यक्ताननिरूपणम्‌ ,.. ९०० चतुविशचतितच्वस्ररूपादिनिरूपणम्‌ ९० तययन्तविद्याया अह्नाननिवतकत्कथनम्‌ .. ९०४ बुदधह्ाश्चसाक्ञानहेतुत्वेफथनम्‌ .. ९०५ अरिष्टनिरूपणपूवेकं तत्फरनिरूपणम्‌ ~ ९०६ अरिष्टविशेषदशनस्यानथषिहेषहेतुखकथनम्‌ र, . अरिष्टविमोक्षरुक्षणादिकथनम्‌ .. ९०८ आभ्यास्मिकविपयपरामश्षेनम्‌ + ९०९ बन्धविमोक्षयोः तैविभ्यकथनम्‌ ..“ श्र ९५९ मानसतीरथश्ञाचनिरूपणम्‌ ... ९१३ श्रीभगवति भक्तेरषोत्तमतीथैत्वकथनम्‌ ~ ९१४ आष्मगुणानामेव पएरिशयुदधती्पुल्यत्वकथनम्‌ छः शारीरपार्थिषमेदेन भिन्नष्य तीर्थ सिदधिहेपुत्व- कथनम्‌ . ९५५ १०० जीवोत्मनामुपत्यादिप्रकारनिरूपणम्‌ ~“ ९१ धर्मस्येव तापिवायाधिव्येन धर्मखव जीवान मा सषा यत्वकथनम्‌ .„ ९१८ धर्मस्यैव जीवानां प्राणातशत्वकथनम्‌ .. ५९

{ए 1--2*

१० अनुशासनपवेविषयानुक्रमणिका

जेभ्यः

१०० जीवानां रेतस्सम्प्तिप्रकारकथनम्‌ जीवानां गर्भादत्पत्तिमातेण स्थिलादप्रकारकथनम्‌

जीवानां वितिधवस्यत्वानुसारेण तत्तत्कमफटानुभव-

कथनम्‌ जीवानां दुष्कमेभिः ति्यैगादियोन्युखत्तिकथनम्‌ जीवानां यातनाषङ्गसयेन तस्फरकथनम्‌ जीवानां सता परिदृ्तिप्रकारक्थनम्‌

4०१ पपक्मंणामनुतापेन विना्गकथनम्‌ अन्नदानस्य सर्वपापविनिर्मोकदतुस्वक्थनम्‌ पापनिवतैकोपायप्रतिपादनम्‌ चतुणा वेणानां दातृखदानपादत्वाम्यां दानतत्फछ- कथनम्‌

१०२ अर्हिसाधर्ख प्रहसनम्‌

१०३ अरिसायाः धम्यैतकथनम्‌

मांसिमश्चणस्य दोपत्वकथनपूषक दोषणां चातुर्विष्य- कथनम्‌ १०४ अद्िसायाः धम्यैत्वकथनपूवैकं मांसमक्षणनिषेध- कथनम्‌ अभयदानसय प्ररसनम्‌ देवानां मासभक्षणामावादेवाकुतोभयत्वकथनम्‌ अमांसभक्चणस्य भ्रेयस्करत्वकथनम्‌ अरमांसमक्षणख्य सर्वद पिश्चयोत्कर्षकथनम्‌ ` ¢ भ, (०४ [>+ कमैविकशेषेषु हिंसायाः वेदिकलत्वकथनम्‌ मासपरियागिनां राक्तं नामकथनम्‌ मधुर्मांसवनख सर्वापद्ठिमोक्षहेतुत्वकथनम्‌ १०५ मसिगतगुणदोषकथनम्‌ दयागुण्ख प्रश्षसनम्‌

९२१ ९२६ ९२७ ९२३१ ९३२

९३३ ९२५

९३८

९४० ९४२ ९४३ ९४४ ९४५ ९४६ ९४७ ९४८ ५४० ९५२

अनुञ्चासनपवैविषयानुक्रमणिका

-अभ्यायः १०५ अहिंसायाः प्रदीसनम्‌

"१०६ कीरोपाख्यानकथनम्‌ व्यासकीरसवादः कीटेन स्वपुववरत्तान्तकथनम्‌ व्यासेन कोट प्रत्युग्रहप्रदानम्‌ कीटेन भ्यास प्रति तच्छतानुग्रह छघनम्‌ ग्यासेन कीटं प्रति व्राह्यण्यवरप्रदानम्‌

१०५ व्यासमैतेयसवादेन दानस्य प्ररसनम्‌ व्यासमैचेयस्षवादः विद्यातपसोः प्रहसनम्‌

१०८ श्ाण्डिल्यसुमनासवादेन पतित्रताधर्मप्रतिपादनम्‌ सुमनया स्चरितधर्मप्रतिपादनम्‌

१०९ नारदपुण्डरीकसवादेन श्रीमश्नारायणस्यैव वे्यत्वोपासखत्वरूथनम्‌ श्रोमन्नारायणमहिमानुवणेनम्‌ ध्रीभगवदाराधनस्यैव सद्वतिप्रापकत्वकथनम्‌

` ११० रक्षोबराह्मणसवादेन साम्न एव सकरुवद्रीकरणोपायः

त्वकथनस्‌

रक्षोत्राह्यणसवादः

` १५१ युधिष्टरिण धर्मादिप्रक्षः भ्रीभगवता पुता तपश्चरणम्‌ ऋषिभिः श्रीभगवतः स्तुतिविधानम्‌ श्रीभगवता पुतोत्पादनकारणक्थनम्‌

ककष

0

क्रीभगवता हिमवतः भीकरणयपूषेकं पुनरीवनम्‌ ...

कपिभिः नारदं प्र्याश्च्यकथनचोदनम्‌ ११२ नारदेन हिमवद्विर्याश्चयैकथनम्‌

# की

९६४ ९६५ ९७० ९०२ ५५२ ९५५

९०६ ९.५४

५५३ ९८० ९८५ ९८७ ९९० ५९१ ९९२ ९२४ ५९५

१२ अनुशासनपवैविषयानुक्रमणिका

अध्यायः

११२ हिमवद्भिरो श्रोपरमेश्वरवणनम्‌ पाल्या श्रीपरमेश्वरनयनपिधानेन तख तृतीयरोच- नोर्पत्या हिमवद्विरेदहनम्‌

११३ श्रीषरमेश्वरेण हिमवद्भिरः पुनरुजोवनम्‌ पा्वैधया तृतीयरोचनसटिकारणग्ररनः श्रीपरमेश्वरेण तृतीयलोचनसषकारणकथनम्‌ श्रीपरमेश्वरेण खस्य चपुञुखस्वकारणकथनम्‌ श्रीपरमेश्वरेण स्वस्य न.रुकण्टस्वकारणकथनम्‌ श्रीपरमेश्वरेण स्वस्य पिनाक्यस्यधनुरागमप्रकार-

कथनम्‌

श्रीपरमेश्वरेण खस्य वृपभवाहनत्वकारणकथनम्‌

११४ श्रीपरमेश्वरेण स्वस्य रमद्ानवासकारणकथनम्‌ श्रीपरमेश्वरेण सस्य व्रिरूपाक्चत्वकारणकथनम्‌ श्रीपरमेश्वरेण चन्दरकलाधारणकारणकथनस्‌ ऋषिभिः श्रीपरमेश्वरस्तोतविधानम्‌

११५ वर्णाोश्रमधर्मकथनम्‌

११६ अरष्िधमैकथनम्‌ पा्वैतीपरमेश्वरसंवादः

११० निव्रत्तिघमेफरक्रथनम्‌ गृहस्थधमैतत्फरयोश्च कथनम्‌ उमामहेश्वरसवादः

११८ विस्तरेण राजघमैकथनम्‌

११९ पुर्षस्यास्थानेषु रेतोविसगेनिषेधः अष्िसाधमेप्रहञ

स्ने हिंसायाः दु स्यज्त्वकथनम्‌ “~ इन्दियनिग्रहप्रह्णसनम्‌ „^

निवृत्तिधमैस्योत्तमोत्तमसु्वहेतुत्वकथनम्‌

पुरम्‌. ९९७

९९८

१०००.

९००५. १००६ ९००४

१०० १००६ १००८. १०१९० १०१५. १०१९ १०१४. १०२१ १०२४ १०३१ १०३३ १०३५. १०३५.

१०४८. १०५१.

१०५९.

अनुशासनपवेविषयादुकमणिका

"अध्यायः

११९ जायमानजीषरश्िः म्रद्युवदयसखकथनम्‌

१२० विधेः दुरुद्ध यत्वकथनम्‌ राजयोधादिधर्मकथनम्‌

१२१ रक्तां सगयायाः घर्मखकथनम्‌ 3 ब्राह्मणानामल्यन्तादरणीयत्वकथनम्‌

ब्राद्यणकोपन्यावन्भ्यत्वकथनम्‌ राजधमैकथनस्‌

१२२ तिवरौनिरूपणम्‌ मानुषाण सामान्येन बरत्यादिनिरूपणम्‌

१२३ व्राह्यण्यादीनां कर्माघीनत्वप्रतिपादनम्‌ तत्तजातीयधर्मादिव्यत्यये दुगनिप्रि पनम्‌

कार्देश्ाद्यनुगुणकर्माचरणनियमनम्‌ तत्तस्कमानुसारेण फलमेदरकथनम्‌ उमामदे्रसवादः

३२९ अन्धत्वादिकारणकमेविपाहृनिखूपणम्‌ अक्षिरोगकारणकमैनिरूपणम्‌

कणेरोगकारणप्रतिपादनम्‌ उदरबाधाकारणनिरूपणम्‌ मेह नदाषकारणविवेचनस्‌

शोषग्याधिकारणनिरूपणम्‌

कुष्टरागनिदाननिरूपणम्‌

अङ्गवैकस्यकारणकथनम्‌

ग्रन्थ्यादिदोषकारणकथनम्‌

पादरागकारणकथनम्‌

वातपित्तादिदोषकारणकय्रनम्‌

१४ अनुश्षासनपवेविषयानुक्रमणिका

अभ्यायः

१२४ कुम्मत्वादिदोपकारणकथनम्‌ पि्ाघादिरूपेणावस्थानश्ारणकथनम्‌ उनेपत्यत्वकारणकथनम्‌ चणवृद्धिकारणकथनम्‌ जीवानामेस्थानजन्मप्राक्चिकारण्कथनम्‌ कीबत्वादिकारणक्रथनम्‌

¶२५ स्तीणं पुशचलीलादितुदष्कमैकथनम्‌ उमामहेश्वरसवादः ग्राणिनां नीचवृत्तिकारणकथनम्‌ प्राणिना दाहे कमैनिरूपणम्‌ चण्डालत्वग्रयोजक ;ष्कमरि रूपणम्‌ प्राणिनामाकिद्धन्यहेुकमेनिरूपणम्‌ प्राणिनां सर्वखत्यपगमकारणनिरूपणम्‌ प्राणिन नानाविधवधप्रासिहेतुनि रूपणम्‌ प्राणिनां दण्डहेदक्मरिरूपणम्‌

मनुपाणमेतरवृत्तवमैमानकमैफरानुभवः देवषी- णाँ तु वर्तमानमादकमैफलानुभव इति कथनम्‌ ““ ` प्राणिनामिह दृण्डनेर यमरोके दण्डाभावक्थनम्‌

प्राणिनां क्षिक्षणेन पापनिवृत्तिप्ररनः प्रायश्चित्तादिना पापापनोदनकथनम्‌ प्राणिनां कारणाकारणभ्यां मरणोद्धवहेतुनिरूपणम्‌ ... कमफरनिरूपणम्‌ कैरते नवग्रहाधीनतनिरूपणम्‌

प्राणिनां देहयागहेतुनिरूपणम्‌ बाखृद्धान{ मरणन्ययारहेतुनिरूपणम्‌

युष्म्‌ ११०३. ११०४ »

११०५ ११०६ १९०७. ११०९ १११०. ११११

१११२ १११४.

९१११५ १११६

९१११० १११८.

१११९ ११२०.

१५२१९ ११९२ १९२४ ११२५ ११२७ ११२८

अनुशासनपवेविषयानुक्रमणिका

अन्यायः

१२५

१२६

५२9

प्राणिनां चिरजीवित्वास्पायुष्ुकारणनिरूपणम्‌ प्राणिनं स्वीलवपुस्सभेदप्रयोजकक्मनिरूपणम्‌ विधिचोद्वितर्दिसायाः सद्रतिप्रापकः्वकथनम्‌ उद्धिजादिरूपेण प्राणिनां चतुर्विघ्रष्वनिरूपणम्‌ ज्तानस्य श्रेयस्साधकत्वनिरूपणम्‌

कर्मणामेव पुनन्माद्विारणद्वकथनम्‌ देवमानुपकमैभेदनिरूपणम्‌

जीवस गमानुप्रव्ेश्प्रकारकथनम्‌

दैवसम्पदः पुदपकारपूषैकत्वकथनम्‌

जोवात्मनां जननमरणपरकारनिरूपणम्‌ .. जवास्सनां मतभेदेन कमैफलानुभवादिगोचरविचारः

यमनगरतन्मार्गारिगप्रतिपादनम्‌

यातनानुभवप्रकारकथनम्‌ रारवादिनरकप्रतिपादनम्‌

पापतारतम्येन फलानु भवः

पापकर्मणां जोवार्ना नीचयानिषु जन्मसम्भवः कमैणीं मानसिकत्वादिभेदनिरूपणम्‌ समयविक्षेपे पापकरणोऽपि धर्मेव्वाभ्यनुद्ठानम्‌ मयपाननिपेधकथनम्‌ मचपानजन्यदोपकथनमं

सक्तस्य लंविभ्यकथनम्‌

जीवान श्रुभप्राप्षिप्रकारकथनम्‌ क्लोचविधिप्रकारनिरूपणम्‌ आहारनियमकथनम्‌

मांसमक्चषणनिपधकधनसर

१५

पुरम्‌ ११२९. ११३१ ११३४ ११३५ ५१३७ ९१३८ ११४० १९४१

५१४२

११४४ ५१४६

११४८ ११५२ ११५४ ११८५६ ९६१ १६६० ९१६३ ५५६४ ११६५ ९१६७ ११६० ५१ ११०१ ९५१७२

अनुश्चासनपवेविषयानुक्रमणिका

अध्यायः १२८ गुरुपूजादिफरकथनम्‌

उपवासादिफर्कथनम्‌

बह्मचर्यप्रश्सनम्‌ तीथस्नानविधिफरनिरूपणम्‌ दानविधितःफकरूनिरूपणम्‌ दानयेःग्यकारुक्चेवादिनिरूपणम्‌ अन्नादिदेयवस्तुविशेषाणां दानग्रश्रसनम्‌ मूगवादिदानप्रदीसनम्‌

कन्यादानमरहसनम्‌

तिरुदानप्रज्ञसनम्‌ जखदानप्रहसनम्‌

सेपुकुपतयाकनिर्माणफरुनिरूपणम्‌ दानस्य षाङ्कण्यकथनम्‌ यज्ञप्रहसनस्‌

देवपूजायाः फलगप्रतिपादनम्‌ देवानां मारुषचष्ितक्तानकथनम्‌

१२९ पितृमेधप्रकारकथनम्‌

श्रा विधानकथनम्‌ श्राद्धिमन्वणाहविवेचनम्‌

ध्राद्धाहपदा्भनिरूपणस्‌ हव्यकव्यकमेणोरवस्यकतेव्य्वकारणकथनम्‌ दानत्फरग्रतिपादनम्‌

नानाधर्मैतत्फर्प्रतिपादनम्‌

सुङृतिगम्य पुण्यरोकानां विवेचनम्‌

अनुशासनपवेषियषानुक्रमणिका

"अन्यायः

* ३०५

ङि

१३

१३२

प्राणिनां दैविभ्यकथनपूवैक दमा्मकनैफरनि- रूपणम्‌

नराणां सखरैगमनहेपुनिरूपणम्‌

दैवासुरकमैणोः ुमाह्ुमत्वकथनम्‌

मरणस्य स्वभावप्रयतान्यतरसाभ्यत्वेन दरैविभ्यकथनम्‌.

यत्रजमरणस्यापि द्ेविभ्यकथनम्‌ धः

आर्मन्यागस्य चातुर्विभ्यकथनम्‌

मह प्रस्थानपिधानप्रकारकथनम्‌

सतजीषे कतैग्यग्रकारकथनम्‌

नानाधरमेतत्फलेषु प्रकषः

नानाधमपिक्षथा मोक्षधरमस्य ्रेष्टत्वकथनम्‌

ज्ञानस्य मोक्चोपायत्वरकथनम्‌

मोक्षाथक्तानप्राप्टयुपायकथनम्‌

मुमुष्चुधमेकथनम्‌ ००

मुमुक्षोः सांसारिकविपयवेतृष्ण्यकथनम्‌

अथेस्यानथहेतुस्वकथनम्‌

तृष्णायाः दुःखहेतुत्वकथनम्‌

दून्टियनिग्रहस्य मुखहेतुत्वकथनम्‌

जरामरणयोः मोध्चैकनिवयत्वक्रधनम्‌

एेश्रया{दीनां जराग्रव्युतरणहेतु्वाभावकथनम्‌

सर्वेषा जन्त ना काख्वदयस्वकथनम्‌

वैराग्यश्य श्रान्त्यादिकारणलवक्यनम

साह्ुयत्तानग्रतिपादनम्‌ चतुर्धिश्यतितच्चानामुस्पत्तिकथनम्‌

१८ अनुरासनपवैविषयानुकमणिका

अध्याधः

१२२ सच्रादिगुणकायैनिरूपणम्‌ महदादीनां रक्षणादिकेथनम्‌ कर्मेन्द्रियनिरूपणम परमात्मनः दुर्दशैतकथनपूैकं सवैम्यापित्वकथनम्‌ ... प्रकृतिपुरषयोः खरूपल्भावादिनिरूपणम्‌ १३२ योगनिरूपणम्‌ योगिङत्यनिरूपणम्‌ प्राणादिवाधह्धव्यनिरूपणम्‌ प्राणादिरधसख मनप्रसादहेतुखकथनम्‌ 1 योगफरनिरूपणम्‌ १३४ परमेश्वरसायुज्यादिप्रभावकथनम्‌ परमेश्वरप्राप्टयुपायकथधनम्‌ परमेश्वराचनस्य दीक्षाहेतुकत्वकथनम्‌ परमेश्वराचनफरुकथनम्‌ १६५ घोधरमेकथनपू्वैकं घ्लीण। नामकथनम्‌ गङ्पार्वतीसवादः १२६ पेया देवगन्धवादिक्चो्णा मभ्ये स्वीधर्मकथनम्‌ खीणपं पातिच्रयनियमकथनम्‌

पतिपरियागपूषैकं देषत्रतया दिया यमसम्भापणम्‌ ...

१२७ घ्ीध्रमैकथनम्‌ आसुरे चीराक्षसीनां द्लीणां इत्तादिकथनम्‌ १३८ विप्रकन्योपाख्यानम्‌ परमाप्मप्रातवुपायनिरूपणम्‌ जप चापुरविभ्यकथनम्‌ विद्भदक्षणसख महाफर्हेतुत्वकथनम्‌ १३९ देवादीनां नामकीतैनपूषैकं तत्म्रभावकथनम्‌

अनुकश्षासनपवेविषयानुक्रमणिका १९

अध्यायः | पुरम्‌ १४० श्रीषिष्णुसहस्नामण्ोलकथनम्‌ .. १२८१ १४१ ब्राह्मणमदहिमानुवणैनम्‌ ... १२९२ ब्राह्मणानां पूज्यत्वादिकथनम्‌ + १३०० बराह्मणतिरस्कारस्यानथैहेतुतवकथनम्‌ ~ १३०१ १४२ ब्राह्मणमदहिमानुवणैने द्टान्ततया कातेषीयारनकूया- कथनम्‌ #०५ ३० 4 अहरीरिण्या वाचा ब्राद्यण्प्रहसनम्‌ “+ १३०३ कारैवीयिनेन स्ववीर्यकथ्चनम्‌ „~ १३०४ वायुना कार्तवीयजनं प्रति व्राह्मणप्रण्पातविधान- चोदनम्‌ ~. १३०५ वाख्व्जुनतवादः "^^ 9 १४२ अदधिरःप्रभतिव्राह्यणचरितवणनेन ब्राह्यणप्रक्षेसनम्‌ .. १३०६ १४४ काड्थपचरिवकथनम्‌ ... १३०५ उचथ्यापाख्यानकथनम्‌ +, 4842 सामेनचथ्ये प्रति मद्वामिधकन्यायाः प्रतिपादनम्‌ ~ १३११ वर्णन मद्धाया अपहरणम्‌ उचथ्येन समुदशोषणम्‌ -.. ५३९२ वरुणेनोचथ्यं प्रति भदायाः प्रलपेणम्‌ १४५ अगस्यवसिष्टचरिवकथनम्‌ 3१६ १४६ देवासुरयुद्धे राहुणा चन्द्रसृयेपराभवः ... 4३०५ अिणा उन्द्रीभूय तमोनिरसनम्‌ -.“ ९३१८ च्यवनेनाधिनोः सोमपानदापनग्रतिक्तानम्‌ ... १३१९ च्यवनेन सवजेन्दरस्तम्भनम्‌ ..„ १३२० १४७ देवरैः ब्रह्माणं प्रति ह्ारणवरणम्‌ ~ १३२१

देवप्रा्धितैः वराह्यणरग्निसजैनेन कपडननम्‌ ... १३२३

२० अनुशासनपवेबिषयातुक्रमणिका

अध्यायः १४८ भीष्मेण श्वसयाराक्तेः बराह्मणमहिश्नः श्रीभगतोऽवगमननिय- मनम्‌ कः ध्रीभगवतः श्रीमन्नारायणतवकथनपूवंकं तन्महिमानुवणै- गस्‌ | १४९ श्रीभगवता दुर्वासश्चरिवकथनेन ब्राह्मणमहिमानुवण- नम्‌ बरह्मणप्रभावकथनम्‌ श्रीमगवहु्वाससोस्सवादः १५० श्रीभगवता रद्रचरिवकथनम्‌ रूदेण दक्षयक्तमध्व॑सनम्‌ स्देण तिपुरसहारः १५१ श्रीभगवता शिवमहिमानुवणैनम्‌ ९५२ धर्मनिश्चायकेप्रमाणनिरूपणम्‌ धर्माधर्मनिरूपणम्‌ धमस कारणतयनिरूपणम्‌ ध्मैविचारस्य तेबिभ्यकथनम्‌ धर्माधमफरप्रतिपादनम्‌ ०८ गुरोषैचनस्यावद्यकवैन्यलछनियमनम्‌

सदाचारनिरूपणस्‌ पापानां प्रायश्चित्तापनोद्खकथनम्‌

१५३ युधिष्टिरेण जनानां विषये सुदुःलप्राष पर्न पुण्यपापरूपकमनुगरेण सुखदरुःखोपपत्तिकथनम्‌ १५४ धर्माणां विवेचनेन तस्प्र्ञसनम्‌ भीष्मेन श्रीभगवद्यानाय वारुपरमः भ्यासेन भप्त प्रति युधिष्ठिरस नगरगमनाभ्यनु* ज्तानचोदनम्‌

अनुासनपवेत्रिपथानुकमणिका

१५४ भीप्तेण युधिष्टिर प्रलादयोषैचनम्‌ युधिष्टरेण सपरिवारं खपुरं प्रति प्रस्थानम्‌

मीष्मखगारोहणप्व

१५५ युधिष्िरिणाभिषेकपूत्रकं राज्यपरिपार्नम्‌ युधिष्िरेण सपरिवारं मीष्मसमीपोपसर्पणम्‌ = युधिष्ठिरेण भीष्मे प्रति सपरिवारस्वागम ननिवेदनम्‌ -.. मीप्मेण युधिष्टिर प्रति अनुग्रहोक्तिः भीष्मेण एतराषट् परदयुकतिः भीष्मेण श्रीभगवन्ते प्रति स्तुतिविधानपूषकं

पाण्डवाद्यनुमहप्राथनम्‌ श्रभगवता भीप्पै प्रति वसुषु सङ्ग्यनुग्रह विधानम्‌ „~ भीष्मेण निर्याणदश्ार्या पाण्डवादोन्‌ प्रसयुन्धिः

१५६ भीष्मेण खमूधैमभ्यभागमेदनपूव॑% सतैसमक्ष

स्वगाराहणम्‌ 4 शतराषट्रदिभिः मष्मस्य विधिवत्‌ पतृककरमनिषैतैनम्‌... गङ्कादेन्या खयुमीष्मसरगारोदणेन जरा दरम्य प्रखापः श्रीभगवता रङ्गादेन्यास्समाश्चासनम्‌ गङ्खादेम्या समाश्वाशनपूरवैकं जखूवतारणम्‌

२९१

१३६५ ` १२३६६

१३६५. 9१ १३६९ १३०५

9

९३५१. ५३०२ १३०६

१३०४ ५३.७५ ५६.७६ १३७ १३०८.

---~- ~~~ तिकि

महाभारतम्‌

१३॥ अनुशास्नपवेणि १२॥ द्वितीयसम्पुटम्‌

¢ अनुज्ञासानपवेणि - द्वितीयमरपुम्‌ दि की कअ एक्रनशाततमाऽध्यायः भवी ( आलुश्चारः रिप ) भीष्मेण युधिष्टिर परनि शरादे यनीयधान्यदाकादि्रनिपादकावि निमिरवादानुवादः तवा निमिद्नश्राद्रयारानृवादेन राद विधिकथधनम्‌ २॥

युधिष्ठिः- केन सङ्करिपतं श्राद्धं कस्मिन्‌ कटे किमाल्मकम्‌ येन सङ्कल्पितं चेव तन्म ब्रुहि पितामह ? 1भग्वद्धिरस्के कारे मुनिना कतरेण वा | कानि श्रादधेपु बञ्यानि काति मूलफखनि धान्यध्नायश्च का व्याच तन्मे त्रहि पितामह >॥ भीष्मः खायम्भुवोऽधिः कौरञ्य परमर्धिः प्रतापवान्‌ तस्य वंशे महाराज दत्तात्रेय इति स्मरतः | दत्तात्रेयस्य पुत्रोऽभूतनिमिनाम तपोधनः निमेश्वाप्यमवत्‌ पुत्रस्‌ श्रीमान्नाम भरिया वृतः ४।

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1. अ-क-घ- नास्तीदमधम्‌ ५. क~व-- जातिषु [--ा

६९८ महाभारतम्‌

पूणे वषैसहखान्ते छता दुष्करं तपः काट्धमेनिपातात्मा "निधनं सरुपागतः निमिस्तु करता श्राद्धानि विषिदरेन कमेण सन्तापमगमत्‌ तीतर पुत्रशोकपरायणः

अथ करखोपकायोणि चतुदयां महामतिः तमेव गणयन्‌ शोकं विरात्र प्रयतुध्यत त्यासीत्‌ प्रतिबुद्ध शोकेन पिहितात्मनः मनस्संहय्य विषये वुदधि्विलारगामिनी ततस्सञ्चिन्तयामास श्राद्रकसपं समाहितः यानि तस्येव भोग्यानि माति फाति रक्तानि यानि चान्यानि यानि चेनि त्ख दि। तानि स्बोणि मनसा विनिश्चय तपोधनः अमावां महाराज विप्रानानाय्य पूजितान्‌ दक्षिणावर्तिकास्सवो व्रसीस्छयमथाकरोत्‌

सप्र विरक्तस्य भोज्याम्‌ युगपत्‌ समुपानयत्‌ छते लवणं मोभ्यं रयामाकात्ं